त्वचा में जब वायु की दृष्टि हो जाती हैं तो त्वचा रूखी ,फटी हुई ,शून्य ,पतली और काले वर्ण की हो जाती हैं ।उसमे सुई चुभोने सी पीड़ा ,तनाव ,और लालिमा हो जाती हैं ,शरीर के भिन्न भिन्न पर्वों में वेदना होती हैं .। यह बहुत सामान्य बीमारी हैं  और बढाती उम्र के साथ यह रोग होता हैं। वैसे यह समुचित आहार के न होने से होता हैं। 
हाथ और पैर सुन्न पड़ना आमतौर पर गंभीर बात नहीं होती है, लेकिन अगर शरीर के किसी अंग में बार बार झुनझुनाहट आ रही है या सुन्न पड़ रहा है, जिसका असर काफी देर तक रहता है., ।
यदि आप एक ही आसन में लंबे समय तक बैठे रहते हैं तो आपके हाथों और पैरों में झुनझुनी की समस्या होती है। एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठे रहने के दौरान हाथ और पैर में झनझनाहट उत्पन्न होने लगती है, यह किसी बीमारी का अंदेशा नहीं होता है। हाथों और पैरों में झुनझुनी (झनझनाहट) की वजह से आपके हाथ और पैर कुछ देर के लिए सुन्न हो जाते हैं, इस दौरान आपको चुभन जैसी तकलीफ का एहसास होता है।
ऐसे समय में हाथ-पैर हिलाने में आप असमर्थ महसूस करते हैं। साथ ही शरीर के किसी हिस्से में अंदरुनी चोट की वजह से भी झनझनाहट पैदा हो सकती है, हमारे शरीर में ज्यादा झुनझुनी आना हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।
हाथ−पैरों में झनझनाहट और सुन्न होने की समस्या के विभिन्न कारण हो सकते हैं। कुछ बीमारियां जैसे थायराइड, मधुमेह, स्ट्रोक व अन्य कई बीमारियों के कारण भी हाथ−पैरों में झनझनाहट और सुन्न होने की समस्या होती है।
गंभीरता से लें हाथों और पैरों की झनझनाहट
हम रात में एक ही अवस्था में देर तक सोए रहते हैं, जिससे हमारे पैर या हाथ सुन्न हो जाते हैं या उसमें झुनझुनी चढ़ जाती है, इस दौरान हाथ या पैर के जिस हिस्से में झुनझुनी हुई है, स्पर्श करने से किसी तरह का एहसास नहीं होता है। साथ ही हम अपने हाथ और पैर का हलन चलन   करने में असमर्थ हो जाते हैं। थोड़ा सा दर्द भी महसूस होने लगता है। उस जगह पर थोड़ी देर मालिश करने से हाथों और पैरों की झुनझुनाहट को दूर किया जा सकता है। यदि मालिश के बाद भी झुनझुनाहट दूर नहीं होती तो किसी बीमारी का अंदेशा हो सकता है।
रक्त संचार की कमी की वजह से भी हाथ और पैर में झनझनाहट होने लगती है। हमारे शरीर में यदि रक्त संचार ठीक से नहीं होता है तो हमारी नसों में इसका असर होता है, जिससे हमारे शरीर के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सीजन ठीक से पहुंच नहीं पाती और हमें शरीर में झनझनाहट और सुन्न जैसी अवस्था का सामना करना पड़ सकता है।
यदि हम नसों से संबंधित बीमारी से पीड़ित हैं तो हमारे हाथ-पैर की अंगुली व जोड़ सुन्न पड़ जाते हैं, हमारे हाथों और पैरों में ऐसा एहसास होता है कि जैसे किसी ने सुई चुभा देती है, यह दर्द कभी कभी असहनीय होती है।
अगर आपकी हाथों की अंगुलियों और कलाई में लंबे समय तक झनझनाहट रहती है या वह सुन्न पड़ जाते हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करें। यह लक्षण कार्पल टनल सिंड्रोम बीमारी के हो सकते हैं, जिसमें कलाई की बीच की नस जो हाथ और बाजू तक जाती है, बीच की नस दब जाने से अंगुलियों में झनझनाहट की शिकायत हो सकती है।
लगातार टाइपिंग करने की वजह
हाथों में झनझनाहट की वजह लगातार टाइपिंग करने की वजह से भी होती है, लैपटॉप, मोबाइल और कम्प्यूटर में बहुत देर टाइपिंग करने की वजह से भी कलाई की नसों पर बुरा असर पड़ता है। आजकल लोग घंटों एक ही पोजीशन में बैठकर मोबाइल में खेलते रहते हैं, काफी देर हाथों को एक ही पोीजशन में रखे रहने से भी हाथ में झनझनाहट होने लगती है।
नस दब जाने की वजह से
कमर या गर्दन की नस दब जाने की वजह से भी पैरों में झनझनाहट होती है, हमारे पैरों और हाथों में झनझनाहट की वजह चोट लगने, गलत तरीके से बैठने के कारण भी हो सकता है। रीढ़ की हड्डी के खराब होने से आसपास की नसों पर दबाव बनता है। ऐसे में सर्वाइकल की समस्या शुरू हो जाती है। इससे भी हाथ-पैर सुन्न होने लगते हैं।
गर्भवती होना
किसी किसीगर्भवती महिलाओं को भी पैर में झनझनाहट की समस्या कभी कभी हो जाती है। जिन महिलाओं के पैर के तलवे सपाट होते हैं, जिससे उनकी नस पर दवाब पड़ता है, ऐसे में पैर में झनझनाहट होती है।
शराब का अधिक सेवन
हाथों और पैरों में झनझनाहट की समस्या उन लोगों को भी हो सकती है, जो लोग शराब का अधिक सेवन करते हैं। शराब के अधिक सेवन की वजह से कोशिकाओं में झनझनाहट होने लगती है, जिससे हाथ व पैर सुन्न हो जाते हैं।
बीड़ी सिगरेट तम्बाखू का सेवन भी हानिकारक होता हैं। इनके सेवन से यह  रोग अधिक होता हैं। इनसे बचना चाहिए.
हाथों और पैरों में झनझनाहट या सुन्न होने के कारण
डायबिटीज
हाथों और पैरों में हमेशा झनझनाहट की वजह डायबिटीज भी होती है। इसीलिए अपना शुगर समय- समय पर चेक करवा लेना चाहिए और दवाओं व उचित खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
थाइरॉयड
हम बहुत बार बीमारियों की अनदेखी करते हैं, हाथ व पैरों में अकड़न व झनझनाहट का थाइरॉयड की वजह से भी हो सकती है। गले की थाइरॉयड ग्रंथि में गड़बड़ होने की वजह से भी हाथ और पैर सुन्न हो जाते हैं, या हाथों और पैरों में झनझनाहट बनी रहती है। ऐसे में डॉक्टर से इलाज करवाएं और ब्लड की जांच करवाएं।
विटामिन की कमी
विटामिन की कमी की वजह से भी हमारे हाथों और पैरों में झनझनाहट होती है। विटामिन बी 12 की कमी की वजह से हाथों में झनझनाहट और सुन्न होने की शिकायत हो सकती है। डॉक्टर की उचित सलाह के चलते आप विटामिन की दवाईयों ले सकते हैं।
इन बीमारियों और आहारों की कमी के कारण हो सकता है ये लक्षण
आपको बता दें कि ऐसे लक्षण ज्यादातर ठंड के मौसम में देखने को मिलता है. यह शरीर में विटामिन बी कम्पलैक्स, मैग्नीशियम, रिच प्रोटीन समेत अन्य पोषक तत्वों के कारण होता है.
- विटामिन बी और डी की कमी,- फ्लूइड रिटेंशन,- कार्पेल टनेल सिंड्रोम,टाइट कपड़े पहनने के वजह से
- एक स्थिति में ज्यादा देर बैठने से,- नसों के दबने से- फिजिकल एक्टिविटी की कमी की वजह से
- थकान या कमजोरी की वजह से- ड्रग या स्मोक एडिक्ट होने की वजह से,- इसके अलावा उच्च रक्तचाप रोगी,- रीढ़ की हड्डी या मस्तिस्क में ट्यूमर,- थायराइड- डायबिटीज समेत अन्य मरीजों में भी ऐसे लक्षण पाए जाते हैं.
घरेलू उपाय
सुन्न पड़ गए अंग को थोड़ी देर हल्के गुनगुने पानी में भिंगोये. इसे करीब 5-10 मिनट तक पानी में डालकर रखें. तुरंत राहत मिलेगी.
हल्दी वाले दूध से इलाज
हल्दी-दूध में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा होती है जो ब्लड को बॉडी में सर्कुलेट करने में मदद करती है. जिसके कारण नसों में हमेशा प्रवाह होते रहता है.
दालचीनी
दालचीनी में भारी मात्रा में न्यूट्रिएंट्स मौजूद होते हैं जो शरीर में बल्ड फ्लो को बढ़ाते हैं. जिससे अंगों के सुन्न होने की संभावना कम हो जाती है.
मसाज भी अच्छा उपाय है
शरीर का मसाज आज से नहीं सदियों से लोग करवाते आ रहे हैं. इससे सिर्फ थकान से ही नहीं बल्कि इन छोटी-मोटी कई रोगों से मुक्ति मिलती है. इस तरीके से भी शरीर में रक्त प्रवाह सुचारू ढ़ंग से होता है.
योग करना फायदेमंद
कई ऐसे योग हैं जो रक्त को शरीर में प्रवाह करवाने में मददगार है. इन योगों को नियमित रूप से प्रतिदिन करना लाभकारी हो सकता है।
डाइट सही होना जरूरी
पौष्टिक भोजन हमारे शरीर को कई रोगों से बचाते हैं। ज्यादातर अंग के सुन्न होने की समस्या विटामिन बी व डी कम्पलैक्स, मैग्नीशियम, रिच प्रोटीन, आयरन के कारण होता है। ऐसे में जिन फूड्स में ऐसे तत्व पाएं जाते हैं उसका सेवन करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर मूंगफली, , दालचीनी, लहसुन, डार्क चाकलेट, केला, सोयाबीन समेत अन्य आहारों का सेवन कर सकते है। और पानी की मात्रा भी शरीर में सही होना चाहिए।
इस रोग को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए ।इसके जीर्ण होने पर अन्य घातक बीमारियां होने  के अवसर होते हैं ।