श्रीराम और राम भक्त हनुमानजी के बारे में कई तरह की कथाएं भारत और भारत के बाहर भी प्रचलित हैं। हालांकि कई कथाएं तो जनश्रुति पर आधारित या प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। लोग इन कथाओं को पीढ़ी दर पीढ़ी सुनते आए हैं। ऐसी ही एक कथा है रावण की बेटी और हनुमानजी के बारे में। हालांकि इन कथाओं का वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास रचित रामचरितमानस में उल्लेख नहीं मिलता है। आओ जानते हैं क्या है यह कथा।
1. राम की कथा को वाल्मीकि के लिखने के बाद दक्षिण भारतीय लोगों ने अलग तरीके से लिखा। दक्षिण भारतीय लोगों के जीवन में राम का बहुत महत्व है। दक्षिण भारत में रावण का ज्यादा महत्व दिया गया था। इसी को देखते हुए श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया, माली, थाईलैंड, कंबोडिया आदि द्वीप राष्ट्रों में रावण की बहुत ख्याति और सम्मान था इसलिए उक्त देशों में रामकथा को अलग तरीके से लिखा गया।

2. कहते हैं कि रावण की बेटी और हनुमानजी की ये कथा थाईलैंड की रामकियेन नामक रामायण और कंबोडिया की रामकेर नामक रामायण में मिलती है। हालांकि कई जगह पर थाई पात्र तोसाकांथ की बेटी बताया गया है।


3. कहते हैं कि रावण की एक बेटी भी था जिसका नाम सुवर्णमछा या सुवर्णमत्स्य था जो देखने में बहुत ही सुंदर थी। उसे सोने की जलपरी कहा गया है। मतलब स्वर्ण के समान उसका शरीर दमकता था। इसका सही अर्थ सुनहरी मछली होता है। थाईलैंड और कंबोडिया में सुनहरी मछली को उसी तरह पूजा जाता है जिस तरह की चीन में ड्रेगन को।
4. भारतीय रामायण के थाई व कम्बोडियाई संस्करणों के बारे में कहा जाता है कि उसमें लिखा है कि रावण की बेटी सुवर्णमछा (सोने की जलपरी) थी। जब नल और नील की योजन के तहत लंका तक सेतु बनाया जा रहा था तो रावण ने सुवर्णमछा को ही सेतु बनाने के प्रयास को विफल करने का कार्य सौंपा था। वह हनुमानजी का लंका तक सेतु बनाने का प्रयास विफल करने की कोशिश करती है, परंतु इस दौरान ही अंततः वह उनसे प्यार करने लगती है।
5. कथा के अनुसार हनुमानजी और वानर सेना समुद्र में पत्‍थर फेंककर जमाते थे लेकिन वे कुछ समय बाद गायब हो जाते थे। जब हनुमानजी को इस घटना क पता चला तो वे समुद्र में उतरकर देखने लगे कि आखिर ये चट्टाने कहां गायब हो रही है तो उन्होंने देखा कि पानी के अंदर रहने वाले लोग उन्हें कहीं ले जाकर रख देते हैं। तब वे उन लोगों के पीछे गए और वे देखते हैं कि एक मत्स्यकन्या उन सब की नेता है तो वे उसे चुनौती देते हैं। परंतु वह कन्या हनुमानजी को देखकर उनके प्रेम में पड़ जाती है। हनुमानजी ये समझ जाते हैं और तब वे उसे लुभाकर समुद्र के तल पर ले आते हैं और उससे पूछते हैं तुम कौन हो? वह बताती है कि मैं रावण की बेटी हूं। फिर हनुमानजी उस कन्या को समझताते हैं कि रावण ने कितना बुरा कार्य किया और क्यों हम ये पुल बना रहे हैं। तब वह कन्या समझ जाती है और सभी चट्टाने लौटा देती हैं। कहते हैं कि दोनों का एक पुत्र भी होता है जिसका नाम मैकचनू था।