ज्यों-की-त्यों धर दीन्हि चदरिया

30 हज़ार साल पुराना इतिहास लौटेगा, श्रीराम की 96 पीढ़ियों से साक्षात्कार 

इतिहास और तकनीक का फ्यूजन, निर्माण कार्य पर मुख्यमंत्री यादव सख़्त

भोपाल। उज्जैन स्थित सिंधिया-शासनकालीन 138 वर्ष पुराना ऐतिहासिक भव्य कोठी पैलेस  पहले अंतरराष्ट्रीय वीर भारत संग्रहालय में तब्दील होने जा रहा है। इसकी लागत 500 करोड़ रूपए है। इसका इंटीरियर वर्क लगभग पूरा होने जा रहा है और इसी महीने भवन के बाहरी हिस्से के रिनोवेशन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली जाएगी। संग्रहालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 30 हजार साल पुराना इतिहास नजर आएगा। वैदिक काल, रामायण और महाभारत काल, सम्राट विक्रमादित्य युग से लेकर स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों की गाथाओं को जीवंत रूप दिया जा रहा है। भगवान श्रीराम की 96 पीढ़ियों की जानकारी भी दिखाई जाएगी।

यह सिर्फ एक पारंपरिक म्यूजियम नहीं होगा, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक और इमर्सिव एक्सपीरियंस का बेहतरीन फ्यूजन देखने को मिलेगा। मप्र शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत सरकारी ट्रस्ट वीर भारत न्यास द्वारा यहाँ भारत के वैभवशाली इतिहास को दिखाने के लिए इंटरएक्टिव और मल्टीमीडिया एग्जिबिट्स डिजाइन किए जा रहे हैं। परिसर में पर्यटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ओपन-एयर थिएटर भी होगा।

सभी काम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत तेज़ी से चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल में इसका अचानक निरीक्षण कर इसकी समीक्षा की है। मुख्यमंत्री ने अब सख्ती बरतना शुरू कर दिया है और हिदायत दी है कि रिनोवेशन कार्य में केवल पुरानी और पारंपरिक निर्माण पद्धतियों और सामग्रियों का ही उपयोग किया जाए। इसका उद्देश्य इस हेरिटेज इमारत की मौलिकता और ऐतिहासिक भव्यता को पूरी तरह सुरक्षित रखना है। इस पूरे प्रोजेक्ट को सिंहस्थ-2028 के पूर्व, याने वर्ष 2027 के अंत तक पूरा करना है।

संग्रहालय का जीर्णोद्धार कार्य उज्जैन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कराया जा रहा है। अवलोकन के दौरान दी धरोहर कंपनी की अधिकारी संगीता बैस ने मुख्यमंत्री को अब तक हुए जीर्णोद्धार कार्यों और वर्तमान प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान डॉ. यादव ने संग्रहालय के ऐतिहासिक भवन की अधोसंरचना का बारीकी से जायजा लिया।