पुणे. महाराष्ट्र के पुणे में करोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण से कोहराम मचा है. यहां हर दिन हज़ारों की संख्या में कोरोना के नए मरीज़ मिल रहे हैं. लेकिन पुणे ज़िले के 229 गांव कोरोना फ्री है, यानी पिछले साल से लेकर अब तक यहां कोरोना का कोई नया मरीज़ नहीं मिला है. पुणे ज़िला परिषद के सीईओ आयुष प्रसाद के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह है गांव के लोगों का कोरोना प्रोटोकॉल को मानना. जो लोग भी गांव से शहर जाते हैं उन्हें क्वारंटीन में रहना पड़ता है. गांव में इसको लेकर कड़े नियम हैं और हर कोई इसे मानता है.आयुष प्रसाद ने बताया, 'इन गांवों में ऐसे लोग हैं जो व्यापार और काम के उद्देश्य से शहर जाते हैं. लेकिन इन गांवों में वायरस के रोकथाम के उपाय इतने अच्छे हैं कि वे अब तक एक साल से इसे रोकने में कामयाब रहे हैं. लोगों को मास्क नहीं पहनने के लिए दंडित किया जाता है और किसी भी काम के लिए शहर जाने वाले लोगों को लौटने पर हर हाल में क्वारंटीन में रहना पड़ता है.'

कोरोना का कोई केस नहीं
आयुष प्रसाद ने आगे बताया कि इन गांवों के आपसास कुछ केस जरूर आए हैं, लेकिन यहां लोगों को कुछ नहीं हुआ है. इसके अलावा पुणे के 200 गांव ऐसे भी हैं, जहां सिर्फ एक से ज्यादा केस नहीं आए हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पुणे जिले के अंतर्गत आने वाले 1,405 गांवों में 52 लाख की आबादी है. इनमें से 229 गांवों में 6-7 लाख लोग रहते हैं. शहर से लगने वाले जिन 229 गांव से कोरोना के कोई नहीं आए हैं वो हैं- हवेली, अंबेगांव, भोर, खेड़, मूली, मावल, पुरंदर, शिरूर, जुन्नार और वेलहा.


25 हज़ार का बॉन्ड
इस बीच पुणे नगर निगम कोरोना पर लगाम लगाने के लिए नया नियम लेकर आई है. इसके मुताबिक घर में क्वारंटीन रहने वाले लोगों को 25 हज़ार रुपये का बॉन्ड भरना होगा. नगरपालिका आयुक्त रुबल अग्रवाल ने कहा कि मरीजों की निगरानी अलग-अलग तरीकों से की जाएगी. उन्होंने कहा अगर कोई मरीज घर छोड़ता है और क्वारंटीन के नियमों को तोड़ता है, तो उसे 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा.


नियम पर सवाल
हालांकि कानून के जानकारों ने इस नियम पर सवाल उठाए हैं. एक विशेषज्ञ ने इस कदम को तर्कहीन कहा है. उन्होंने कहा कि ये ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीएमसी कोविड -19 संकट का इस्तेमाल पैसा कमाने के लिए कर रही है. एक अन्य कानूनी विशेषज्ञ ने कहा कि इस तरह का कदम लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है और यह गलत मिसाल कायम करेगा. एक आंकड़े के मुताबिक करीब 35 हज़ार लोग इस वक्त होम क्वारंटीन में हैं.