जेके अस्पताल में सफल इलाज, मौत के मुंह से निकला युवक
भोपाल। जेके अस्पताल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता दर्ज करते हुए 26 वर्षीय युवक राजेश मौर्य के पूर्णतः स्वस्थ होकर डिस्चार्ज होने की घोषणा की है। राजेश लगभग दो माह तक जेके अस्पताल के इमरजेंसी मेडिसिन आईसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ते रहे। खास बात यह रही कि उनका पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत निःशुल्क किया गया। परिजनों के अनुसार, 20 नवंबर 2025 को तेलंगाना के करीमनगर में ड्यूटी के बाद राजेश ने संभवतः मिथेनॉल मिश्रित अवैध शराब का सेवन कर लिया, जिसके बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। उन्हें 3–4 बार खून की उल्टी हुई, बेहोशी छा गई और हाथ-पैरों में मिर्गी जैसे तेज़ दौरे पड़ने लगे। शुरुआत में उन्हें तेलंगाना के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। बावजूद इसके, 22 नवंबर 2025 को परिजन मेडिकल सलाह के विरुद्ध उन्हें वहां से छुट्टी दिलाकर जेके अस्पताल लेकर आए। जेके अस्पताल के इमरजेंसी मेडिसिन आईसीयू में भर्ती के समय राजेश की स्थिति अत्यंत नाजुक थी। उन्हें 100.1°F बुखार, 188 प्रति मिनट की तेज़ नाड़ी और ब्लड प्रेशर बनाए रखने के लिए नोरएड्रेनालाईन जैसी शक्तिशाली दवाओं पर रखा गया था। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति जानलेवा थी। डॉ. मनीष बडकुर के नेतृत्व में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दिन-रात उनकी निगरानी और उपचार किया। दिमाग, हृदय एवं अन्य अंगों से जुड़ी गंभीर जटिलताओं का आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों से इलाज किया गया। लगातार प्रयासों के बाद राजेश की हालत में धीरे-धीरे सुधार आया, सभी आवश्यक जांचें सामान्य होने लगीं और जटिलताएं नियंत्रित हो गईं। लगातार दो माह के गहन उपचार और देखभाल के बाद 22 जनवरी 2026 को राजेश को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस अवसर पर जेके अस्पताल प्रबंधन ने राजेश के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की कामना करते हुए आम जनता से अपील की कि ऐसी आपात स्थितियों में समय पर सही अस्पताल और क्रिटिकल केयर तक पहुंचना जीवन बचा सकता है।
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