बैंकिंग सेक्टर में हाई अलर्ट: ग्राहक डेटा सुरक्षा और AI खतरों पर चर्चा
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और खतरों को लेकर बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस उच्चस्तरीय चर्चा में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु यह था कि कैसे नए एआई मॉडल्स सॉफ्टवेयर की खामियों का फायदा उठाकर वित्तीय ढांचे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
बैंकिंग सुरक्षा और डेटा संरक्षण पर जोर
वित्त मंत्री ने बैंकों को अपनी आईटी प्रणालियों को और अधिक अभेद्य बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राहकों के डेटा और वित्तीय संसाधनों की सुरक्षा सर्वोपरि है, जिसके लिए बैंकों को सक्रिय और निवारक कदम उठाने चाहिए। हालांकि, उन्होंने अब तक साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने की दिशा में बैंकों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना भी की।
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के लिए निर्देश
वित्त मंत्री ने 'इंडियन बैंक्स एसोसिएशन' को एक सामूहिक और समन्वित तंत्र विकसित करने की सलाह दी, ताकि साइबर खतरों का तुरंत और प्रभावी मुकाबला किया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिए कि:
- बैंक अपनी निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए शीर्ष साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और विशेष एजेंसियों की सेवाएं लें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) को दी जाए।
सहयोग और रियल-टाइम सूचना साझाकरण
सीतारमण ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बैंकों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम में खतरों की जानकारी साझा करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे किसी भी संभावित खतरे की समय रहते पहचान कर उसे पूरे सिस्टम में फैलने से रोका जा सकेगा।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू, आरबीआई और एनपीसीआई के वरिष्ठ अधिकारी, तथा विभिन्न अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के एमडी और सीईओ शामिल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि 'मिथोस' जैसे आधुनिक एआई मॉडल आईटी सेवाओं और बैंकिंग सुरक्षा के लिए नए जोखिम पैदा कर सकते हैं, जिसे देखते हुए यह सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
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