संगठन में बदलाव के फैसले पर उठे सवाल
डोंगरगढ़: कांग्रेस संगठन में बगावत की लहर; नई सूची जारी होते ही 30 में से आधे से ज्यादा पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़): डोंगरगढ़ में कांग्रेस संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी और आपसी कलह एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सामने आ गई है। शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा हाल ही में घोषित की गई पदाधिकारियों की सूची ने पार्टी में जोश भरने के बजाय भारी असंतोष पैदा कर दिया है। सूची जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर इस्तीफों की झड़ी लग गई, जिसने स्थानीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।
नियुक्ति के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर इस्तीफों का सैलाब
शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने संगठन विस्तार के लिए पदाधिकारियों की एक लंबी सूची जारी की थी। लेकिन नियुक्त किए गए करीब 30 पदाधिकारियों में से आधे से अधिक ने पद स्वीकार करने से इनकार करते हुए अपने इस्तीफे सौंप दिए।
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सार्वजनिक विरोध: कई नेताओं ने अपने इस्तीफे सीधे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिए, जिससे पार्टी की अंदरूनी खींचतान घर-घर तक पहुँच गई। देखते ही देखते यह विवाद डोंगरगढ़ की गलियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया।
नाराजगी की असली वजह: निजी कारण या गुटबाजी?
इस्तीफा देने वाले कुछ नेताओं ने हालांकि इसे "निजी व्यस्तता" का नाम दिया है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
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असंतोष: पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पदाधिकारियों के चयन में वरिष्ठता और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है।
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गुटबाजी: राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह सामूहिक इस्तीफा सीधे तौर पर संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी का परिणाम है, जो अब नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है।
पार्टी नेतृत्व की चुप्पी और उठते सवाल
हैरानी की बात यह है कि डोंगरगढ़ में कांग्रेस के विधायक और मजबूत जनाधार होने के बावजूद संगठन में इस तरह का बिखराव दिख रहा है। इतने बड़े घटनाक्रम के बाद भी जिला और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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असमंजस: नेतृत्व की इस चुप्पी को विवाद दबाने की कोशिश माना जा रहा है, लेकिन मामला सार्वजनिक होने के कारण कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है।
भविष्य की राह
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व डोंगरगढ़ के इस असंतोष को शांत कर पाएगा? आने वाले समय में यदि समन्वय की कमी दूर नहीं की गई, तो यह विवाद आगामी चुनावी समीकरणों पर भारी पड़ सकता है। फिलहाल, डोंगरगढ़ कांग्रेस की इस आंतरिक कलह ने पार्टी की मजबूती के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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