डॉ.राहुल जैन

आज कोरोना वायरस  दुनियाभर के लिए एक गंभीर पहेली के रूप में सामने है, जिसमें लगभग 2 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु और लगभग 3 मिलियन लोगों के प्रभावित होने की पुष्टि की गई है। आज पूरा विश्व अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है और जीवन बेलगाम घोड़े की भांति सरपट और अनियंत्रित है।रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और यूरोप में खुदरा व्यापार, पर्यटन, आतिथ्य, खेल एवं मनोरंजन आदि जैसे क्षेत्रों पर इस महामारी का गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर रोजगारो पर छंटनी के बादल मंडराने की पूरी संभावना है। यह अनिश्चित भविष्य लाखों लोगों में चिंता का एक बहुत बड़ा  कारण है।


कोरोनवायरस के बाद के दिनों और वर्तमान परिस्थतियों में कुछ तथ्य ध्यान देने योग्य है,यह सुनिश्चित करना है कि जीवन जीने के लिए क्या आवश्यक है।भौतिक संपत्ति को आवश्यकतानुसार रखना अतिमहत्वपूर्ण है और केवल न्यूनतम ऋण या जल्द से जल्द ऋण से मुक्त होने की प्राथमिक्ता।न्यूनतावादी मानसिकता भी न्यूनतम खाने की ओर ले जाएगी जो स्वास्थ्य और खाद्य बजट को बनाए रखने में मदद करेगी।

ये मितव्ययता,बाजारीकरण की वृहद संभावनाओं के लिए जरूर कुछ समय के लिए अनुकूल नहीं है,लेकिन हमारे पूर्वजों की बचत की आदत के अनुरुप है। जिसने देश की विपरीत परस्थितियों में भी परिवार एवं समाज को संभाले रखा।केवल आवश्यक खर्चों पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है और अब छोटे तरीकों की तलाश करें जो बचत में सहायक हो सकते हैं।यहां ध्यान देने की आवश्यकता है कि व्यवस्थित खरीद से उन क्षेत्रों में बचत और निवेश करने में सहायता मिलेगी जो आपके लिए अधिक प्राथमिकता वाले हैं। जैसे : शिक्षा, कैरियर और परिवारसुरक्षा आदि।गैर जरूरी सामानो की खरीद से बचने के लिए इसका बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। इससे अनावश्यक व्यय को रोकने में मदद मिलेगी एवं  आपात स्थिति के लिए बचत सहायक हो सकते हैं।

न्यूनतमवादी मानसिकता प्रकृति के लिए भी संजीवनी समान है,क्योंकि यह ईंधन, बिजली और पानी जैसे संसाधनों को बचाने में मदद करता है।यह मानसिकता परिवार के साथ बिताने के लिए अधिक समय व्यतीत करने में मदद करेगी और लंबे समय से अवरुद्ध शौक को आगे बढ़ाने का अवसर भी देगी,किंतु न्यूनतम मानसिकता का मतलब यह नहीं है कि आप आकांक्षाएं नहीं रखे।वास्तव में, यह मन को अनावश्यक जरूरतों को अलग करने और इसे केंद्रित रखने में मदद करता है।

प्रकृति में निवेश, स्वास्थ्य और संबंध: कोरोनावायरस ने हमें एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक सीखा है कि स्वास्थ्य और कल्याण धन के पीछे भागना से  कहीं अधिक महत्वपूर्ण है । इसने हमें इस बात का भी एहसास कराया है कि प्रकृति सर्वोच्च है और हमें किसी भी समय दयनीय स्थिति में डाल सकती है।हमने देखा है कि कोविड ​​-19 जैसी अप्रत्याशित स्वास्थ्य आपात स्थिति में वृद्ध एवं कम उम्र के बच्चे कितने कमजोर हैं। तो, इस पर विचार करने की जरूरत है ।पर्यावरण को गंभीरता से लेने और उसके पुनर्वास में योगदान करने के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेकर शुरूवात करने का एक दम सही समय है। हमें अपनी जड़ों पर वापस जाने की जरूरत है, जहां प्रकृति की पूजा की जाती थी।

स्वस्थ एवं निरोगी जीवनशैली को बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य में निवेश करने का भी उचित समय है जिससे प्रतिरक्षा और समग्र कल्याण को प्रोत्साहन मिलता है। हमें जीवन अवधि और मेडिक्लेम बीमा के बारे में भी प्राथमिकता स्पष्ट करनी होंगी ।जिसका सरकारी एवं निजी दोनों स्तरों पर जमीनी क्रियान्वयन अत्यावश्यक है।

भारत हमेशा से समृद्ध है, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ हमने स्पर्श खो दिया है। भोजन की आदतों और रहने के तरीके से हमारे पारंपरिक तरीके से फिर से जुड़ना महत्वपूर्ण है।यह हमारे प्रियजनों के साथ सही मायने में जुड़ने और एक मजबूत समनव्य एवं सहयोगात्मक प्रणाली विकसित करने का एक सही समय है; इस कठिन समय में काबू पाने में सकारात्मक मदद करेगा। कभी-कभी ऐसी गतिविधियों की योजना बनाएं जो सभी को कुछ गुणवत्ता पूर्ण समय एक साथ बिताने में मदद करें।


ऑनलाइन भुगतान ऐप्स कैशबैक, रिवार्ड पॉइंट और अन्य आकर्षक ऑफ़र प्रदान करते रहेंगे, इसलिए ऑनलाइन भुगतान करने पर जोर देना चाहिए। क्योंकि, इसके उत्पाद को विभिन्न मापदंडों पर चुनने का विकल्प मिलता है और खरीदारी के लिए भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचने में मदद मिलती है।जो हमारी सरकार की डिजिटल इंडिया एवं सोशल डिस्टेंस की नीति को भी आगे बढ़ाने में सहायक होगी।डिजिटल क्रांति आज कोरोंना के विरुद्ध लड़ाई में एक कारगर उपाय साबित हो रहा है ! जैसे - वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन शिक्षा,वीडियो कॉन्फ्रेंस,विभिन्न सुविधाओं के लिए ऑनलाइन भुगतान आदि काफी हद तक सोशल डिस्टेंस को बनाए रखने के लिए सहायक है ।यहां ये ध्यान देने योग्य बात है, कि आज भी भारत में इन डिजिटल माध्यमों को उपयोग करने वालो की संख्या सीमित है । इसके पीछे कुछ कारण असुरक्षा की भावना, उपयोग करने में असुविधा एवं प्रचार - प्रसार की कमी हो सकते हैं ।

 सरकारी और वित्तीय संस्थानों से संपर्क करें, दुनिया भर की सरकारों ने COVID-19 महामारी से प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए विभिन्न सहायता कार्यक्रमों और प्रोत्साहन पैकेजों की घोषणा की है। इसलिए, जांचें कि क्या आप इन सहायता कार्यक्रमों और लाभों से लाभ पाने के योग्य हैं?ये विशेष रूप से उन लोगों के लिए हैं जो छंटनी का सामना कर रहे हैं या किसी अन्य तरीके से महामारी से प्रभावित हैं। सरकारों ने संकट से उबरने में मदद करने के लिए कर लाभ और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के रूप में छोटे व्यवसाय चलाने वालों के लिए विशेष पैकेजों की भी घोषणा की है।

बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनियां ऋण और ईएमआई संबंधी पुनर्भुगतान के संबंध में क्रेडिट कार्ड या तत्काल व्यक्तिगत ऋण से मदद कर रही हैं। कई संगठनों ने अपने कर्ज प्रतिबद्धताओं के कारण संकट में पड़े लोगों की मदद के लिए ब्याज दरों में कटौती, दंड आदि को कम किया है।

कोरोनोवायरस प्रकोप और लॉकडाउन के समय के दौरान सीखे गए बुनियादी स्वच्छता नियमों को नहीं भूलना चाहिए और उन्हें हमारी दैनिक आदतों का हिस्सा बनाए रखना होगा। अपने साथ एक फर्स्ट-एड बॉक्स भी रखना हर किसी के लिए बुद्धिमान होगा, जिसमें एक साबुन पट्टी, फेस मास्क की एक जोड़ी, हाथ के दस्ताने की एक जोड़ी, सैनिटाइज़र और सामाजिक दूरियों के बारे में याद दिलाने के लिए एक नोट होगा।इसलिए, मैं यह निष्कर्ष निकालना चाहूंगा कि परिवारों के लिए एक साथ आने और कठिन समय पर टिकने के लिए अपने वित्त और जीवन शैली को स्मार्ट तरीके से प्रबंधित करने का समय है। यह कभी न भूलें कि " जिंदगी मिलेगी दोबारा"।
(लेखक आर्थिक और विदेशी मामलों के जानकार है)