नई दिल्ली । कोरोनावायरस इन्फेक्शन की दूसरी लहर तेज हो चली है। इस बीच सोमवार को एक्सपर्ट कमेटी ने रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी है। अब डीजीसीआई इस पर फैसला लेगा। मंजूरी मिलने पर यह भारतीय कोरोना टीकाकरण अभियान में शामिल होने वाली तीसरी वैक्सीन बन जाएगी। भारत में 16 जनवरी को टीकाकरण शुरू हुआ था और इसके लिए इसी साल की शुरुआत में कोवीशील्ड और कोवैक्सिन को मंजूर किया गया था। कोवीशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने मिलकर बनाया है। भारत में पुणे का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसका प्रोडक्शन कर रहा है। कोवैक्सिन को भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ढ्ढष्टरूक्र) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी के साथ मिलकर बनाया है। पिछले हफ्ते रिपोर्ट आई थी कि ज्यादातर बड़े राज्यों में वैक्सीन डोज खत्म हो गए हैं। जिस रफ्तार से टीके लगाए जा रहे हैं, उस रफ्तार से बन नहीं रहे। इस वजह से तीसरी वैक्सीन को मंजूरी देना बेहद जरूरी हो गया था। मॉर्डना और फाइजर की वैक्सीन ही 90 फीसदी अधिक इफेक्टिव साबित हुई हैं। इसके बाद स्पुतनिक-वी ही सबसे अधिक 91.6त्न इफेक्टिव रही है। इसे रूस के गामालेया इंस्टीट्यूट ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड की फंडिंग से बनाया है। यह दो एडेनोवायरस वेक्टर से बनी है यानी कोवीशील्ड जैसी है। कोवीशील्ड में चिम्पांजी में मिलने वाले एडेनोवायरस का इस्तेमाल किया है। वहीं, रूसी वैक्सीन में दो अलग-अलग वेक्टरों को मिलाकर इस्तेमाल किया है। एस्ट्राजेनेका और रूसी वैक्सीन के कम्बाइंड ट्रायल्स की बात भी चल रही है।