आलीराजपुर  जोबट विधानसभा उपचुनाव इस बार पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत हो गया है। चुनाव में शुरू से ही टर्निंग फैक्टर एक-दूसरे की व्यक्तिगत छवि को डैमेज करना रहा है। अंतिम दौर में भी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां मुख्य मुद्दों से ज्यादा व्यक्तिगत छवि को मुद्दा बना रहीं हैं। कांग्रेस के पास खास मुद्दा भाजपा प्रत्याशी सुलोचना रावत के बागी होने, महंगाई, बेरोजगारी व मजदूरों के पलायन का है तो दूसरी ओर भाजपा का मुद्दा कांग्रेस प्रत्याशी महेश पटेल और उनके परिवार की दबंग (धनबल-बाहुबल) वाली छवि है, जिसे वह जोबट के हित में नहीं बताते हुए भुनाने में जुटी है।

यही कारण है कि इस बार दोनों के बीच मुकाबला कशमकश का हो गया है और चुनाव के अंतिम तीन दिन इन प्रत्याशियों के लिए निर्णायक होंगे। स्थितियां ऐसी हैं कि जो बूथ लेवल व अंतिम दौर का मैनेजमेंट कर लें और वह कितना असरकारक रहेगा, इस पर इस सीट का नतीजा निर्भर रहेगा।

वैसे जोबट विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है। इस विधानसभा क्षेत्र में 2.75 लाख वोटर्स हैं, जो प्रत्याशी का भाग्य तय करेंगे। खास बात यह कि इस सीट पर 97 फीसदी आदिवासी वोटर्स हैं। इनमें भील 40 फीसदी, भिलाला 55 फीसदी तथा पटलिया जाति के 5 फीसदी वोटर्स हैं। वैसे यहां भिलाला जाति का ही दबदबा ज्यादा रहा है। विधानसभा क्षेत्र में ढाई सौ से ज्यादा गांव हैं।

जोबट सीट पर अभी तक 14 बार चुनाव हुए हैं। 11 बार यह सीट कांग्रेस के कब्जे में रही, जबकि दो बार भाजपा जीती, लेकिन इस बार भाजपा इसे उप चुनाव न मानकर प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। इधर, कांग्रेस से तीन बार विधायक (2003 में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त) रहीं सुलोचना रावत ने कुछ दिन पहले ही भाजपा जॉइन की और तीन दिन बाद उन्हें टिकट मिला, इसके चलते कांग्रेस ने उन्हें बागी होने का मुख्य मुद्दा बना लिया है। इसके साथ ही दिवंगत कलावती भूरिया के प्रति सहानुभूति बताकर वोटों की अपील की जा रही है।

इस पार्टी से ये स्टार प्रचारक आ चुके

जहां तक स्टार प्रचारक का सवाल है, यहां सुलोचना रावत के पक्ष में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा आदि की सभाएं हो चुकी हैं, जबकि मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा, गोविंदसिंह राजपूत, पार्टी नेता कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला बैठकें कर चुके हैं। स्थानीय रणनीति जोबट प्रभारी गंगा पांडे के हाथों में है। दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री मंत्री कमलनाथ की सभाएं हो चुकी हैं, जबकि विजयलक्ष्मी साधौ, कांतिलाल भूरिया, डॉ. विक्रांत भूरिया, सुरेंद्रसिंह हनी बघेल, जीतू पटवारी आदि भी सभाओं में शिरकत कर चुके हैं तथा सक्रियता बनी हुई है।

रोजगार नहीं, इसलिए रोज सैकड़ों कर रहे पलायन

स्थानीय लोगों में भाजपा के पक्षधर लोग जहां विकास के साथ सुलोचना रावत की अच्छी छवि को लेकर वोट देना चाहते हैं, वहीं एक बड़ा वर्ग महंगाई, बेरोजगारी और खासकर मजदूरों के पलायन के चलते कांग्रेस को वोट देना चाहता है। गांव के जयंतीलाल वाणी के मुताबिक मुकाबला कड़ा है लेकिन महंगाई ने कम तोड़ दी है, रोजगार नहीं मिल रहा है। दुकानदार लाखनलाल भाजपा के विकास मुद्दे से संतुष्ट हैं तथा कांग्रेसी के नाकामयाबी गिनाते हैं।

आवास, नल-जल योजना का हवाला

दिलीप पटेल का कहना है कि उन्हें मकान आवास योजना, जन नल योजना आदि का लाभ मिला है इसलिए वे भाजपा को ही वोट देंगे। मो. इरफान का कहना है कि वे भाजपा व प्रत्याशी सुलोचना रावत के पहले रहे कार्यकाल से संतुष्ट हैं, इसलिए भाजपा को ही वोट देना चाहते हैं। मो. इरफान चुनावी माहौल को अच्छा बताते हैं। व्यापारी महेंद्र जैन का कहना है कि चुनाव में स्थिति कशमकश की है, लेकिन जनता सत्ता के साथ जाती है तो जोबट का विकास होगा। दूसरी ओर, मजदूरों के पास काम नहीं है और इस बार कम बारिश के चलते आगे भी काम मिलने की उम्मीद नहीं है। दुकानदार दिलीप मेडा के मुताबिक रोज तेजी से मजदूर बसों से पलायन कर गुजरात जा रहे हैं। मजदूर उमरेसिंह, जुवान सिंह, नातरीबाई, शुभान सहित कई परिवार काम नहीं मिलने से मोरवी (गुजरात) चले गए हैं।

प्रचार के लिए फलिए और खाटला पंचायत ही दोनों पार्टियों के तरीके

चूंकि अधिकांश वोटर्स गांवों से हैं, इसलिए भाजपा व कांग्रेस दोनों का ही प्रचार का तरीका गांव-गांव जाकर फलिए (8-10 परिवारों को एकत्र करना) बनाकर खाटला पंचायत आयोजित करना है। दरअसल गांवों में फलिए बनाकर वहां के लोगों को गांव का विकास कराने के काम कराने के साथ वोट देने की अपील की जाती है। इसमें जिस तरह से जो लोग एकत्र होते हैं उसे खाटला पंचायत कहते हैं। इधर पार्टी स्तर की व्यवस्था के तहत तीन-चार फलिए से मिलाकर एक बूथ बनाया जाता है। यह पार्टियों का सबसे प्रभावी तरीका है क्योंकि एक बूथ (ग्राम सेक्टर्स) में 1 हजार वोटर्स होते हैं।

हालांकि, छोटे गांवों में ग्राम सेक्टर में 300 से 500 वोटर्स ही रहते हैं। ये फलिए व खाटला पंचायत तीन दिन पहले ही शुरू हुई है जिसमें एक फलिए के लिए पार्टी के 10 कार्यकर्ता और दो वरिष्ठ नेता होते हैं इसका मैनेजमेंट संभालते हैं। प्रचार के इस तरीके के दौरान गांवों के लोग भाजपा प्रत्याशी सुलोचना रावत को ‘मैडम’ कहकर संबोधित कर रहे हैं वहीं कांग्रेस प्रत्याशी महेश पटेल आदिवासी गीत-नृत्य के साथ गांवों के लोगों में प्रभाव जमा रहे हैं। हालांकि वे मूलत: आलीराजपुर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं।

सभाओं में बसों से लाने-ले जाना का सिलसिला

खास बात यह कि इस बार दोनों पार्टियों की जितनी भी सभाएं हुई उसमें कई गांवों के लोग शामिल हुए। इनके आने-जाने के लिए बसों व अन्य वाहनों की व्यवस्था कार्यकर्ताओं द्वारा ही की गई थी। हर सभा में काफी भीड़ देखी गई। चूंकि बुधवार शाम अब चुनाव प्रचाार थम जाएगा इसके चलते अब मौन प्रचार ही होगा और गांव-गांव जाकर इस तरीके से अपील की जाएंगी ताकि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन न हो।

पूर्व के राजनीतिक समीकरण

  • विधानसभा 2008 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सुलोचना रावत ने प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी को 4500 वोटों से शिकस्त दी थी।
  • 2013 में कांग्रेस ने सुलोचना रावत के बेटे विशाल रावत मैदान में उतारा था। करीब 11 हजार वोटों से चुनाव हार गए थे।
  • 2018 में कांग्रेस से कलावती भूरिया ने 46,067 वोट हासिल कर भाजपा के माधोसिंह डावर को 2056 वोटों से हराया था। इस चुनाव में सुलोचना रावत के बेटे विशाल रावत निर्दलीय उम्मीदवार थे।
  • अप्रैल 2021 में कलावती भूरिया की कोरोना से मौत हो गई। इसके चलते उप चुनाव की स्थिति बनी।
  • अक्टूबर 2021 में सुलोचना रावत, उनके बेटे विशाल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। तीन दिन बाद ही सुलोचना रावत को भाजपा की ओर से टिकट मिला।