अहमदाबाद | गुजरात में रॉकेट गति से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि एक साल में उसने इस रोग की रोकथाम के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई| राज्य में कोरोना के लगातार बढ़ते केस, इंजेक्शन और अस्पतालों में बैड की कमी, स्मशान गृह में लगातार चिताओं के जलने की घटना को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए कहा कि लोगों का सरकार से भरोसा खत्म हो चुका है| सरकार ऐसा काम करे जिससे लोगों को उस पर भरोसा कायम हो| गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश विक्रमनाथ और न्यायधीश भार्गव कारिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को सार्वजनिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाने, विवाह कार्यक्रम में केवल 50 लोगों को और मृत्यु प्रसंग में 20 लोगों को एकत्र होने की मंजूरी दे| राज्य में रात्रिकालीन कर्फ्यू का कडाई से अमल नहीं हो रहा है| मास्क और सोशल डिस्टेंस का लोग पालन नहीं कर रहे हैं| हाईकोर्ट ने से कहा कि वार्ड वार और सोसायटी वार एक जिम्मेदारी व्यक्ति को नियुक्ति करे, जो लोगों की समस्या सीधे प्रशासन तक पहुंचाए| अक्टूबर तक कोरोना की स्थिति नियंत्रित थी, लेकिन दिवाली के बाद संक्रमण बढ़ने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाने पर हाईकोर्ट ने सवाल किया| आखिर सरकार ने कैसे मान लिया कि कोरोना खत्म हो चुका है और निजी अस्पताल के बैड उन्हें वापस सौंप दिए गए| दूसरी काफी खतरनाक साबित हो रही है और संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है| हाईकोर्ट ने आरटीपीसीआर टेस्ट के विलंब पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस अवधि में यदि अन्य लोग संक्रमित होते हैं तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? राज्यभर में इंजेक्शन की जरूरत है और एक जगह इंजेक्शन की उपलब्धता हितावह नहीं है| इसके लिए अन्य व्यवस्था भी सरकार को करनी चाहिए| इंजेक्शन का पर्याप्त स्टाक होने के सरकार दावे पर सवाल करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पर्याप्त स्टाक है तो लोगों तक क्यों नहीं पहुंच रहा? इंजेक्शन की कमी नहीं है तो अस्पतालों में उपलब्ध क्यों नहीं है? हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह इंजेक्शन सरलता से लोगों को उपलब्ध हों, इसकी व्यवस्था करे| साथ ही टेस्टिंग बढ़ाने और तेज करने का भी हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है| हाईकोर्ट ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में आरटीपीसीआर टेस्ट की कोई व्यवस्था नहीं है| हाईकोर्ट ने इस बात को लेकर भी सवाल किया कि सामान्य लोगों की आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट आने में काफी विलंब लगता है| जबकि अधिकारी या नेताओं की रिपोर्ट में विलंब नहीं होता| रिपोर्ट में देरी होना भी संक्रमण बढ़ने का एक कारण हो सकता है| हाईकोर्ट ने कहा कि टीके कोई खास असर नहीं हो रहा है| वैक्सीनेशन जरूरी है, लेकिन वह इतना असरदार साबित नहीं हो रहा है| सरकार की पैरवी करते हुए एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने पेशकश की कि यह लड़ाई सरकार और कोरोना के बीच नहीं बल्कि लोग और कोरोना के बीच है| रेमडेसिवीर इंजेक्शन की आवश्यकता सामान्य स्थिति में नहीं होती| इसके बावजूद होम हाइसोलेट मरीज भी रेमडेसिवीर की मांग कर रहे हैं| जरूरी है कि जरूरत के मुताबिक लोगों को रेमडेसिवीर इंजेक्शन के लिए भीड़ करने से बचना चाहिए|