मुंबई । अगर देश में कठोर लॉकडाउन लगता है तो नौकरियों में एक बार फिर भारी छंटनी हो सकती है। देश में 11 अप्रैल को समाप्त हफ्ते में बेरोजगारी दर भी बढ़ कर 8.6 फीसदी पर पहुंच गई है। दो हफ्ते पहले यह दर 6.7 फीसदी पर थी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी द्वारा तैयार रोजगार के नए आंकड़ों के अनुसार, वायरस संक्रमण में रिकॉर्डतोड़ वृद्धि को रोकने के लिए राज्यों द्वारा लगाए जा रहे एक-एक कर लॉकडाउन आने वाले दिनों में नौकरियों में छंटनी का एक बड़ा कारण बनने जा रहे हैं। नौकरियों की छंटनी शहरी क्षेत्रों में अधिक गंभीर समस्या है, जहां यह 10 फीसदी के करीब है। कोरोना के संक्रमण को कंट्रोल करने के लिए पिछले साल की तरह इस साल भी सख्त लॉकडाउन लगाने की बात हर राज्य कर रहे हैं।
महाराष्ट्र में लग सकता है पूरा लॉकडाउन
आर्थिक राजधानी महाराष्ट्र जो वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है, अब वीकेंड लॉकडाउन के बाद और सख्त लॉक डाउन लगाने पर विचार कर रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रात का कफ्र्यू चल रहा है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर इसकी मेडिकल सुविधाओं पर बोझ बढ़ता है तो और सख्त लॉकडाउन लगाया जा सकता है।
पिछले साल घरों में कैद हो गए थे लोग
गौरतलब है कि पिछले साल जब लॉकडाउन लगाया गया था तो लोग अपने-अपने घर में बंद हो गए थे और इससे करोड़ों लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। इसमें प्रवासी मजदूर भी शामिल थे। वह ट्रेन से या पैदल चलकर घर लौट गए थे। हालांकि जब लॉकडाउन के प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देनी शुरू हुई तो अर्थव्यवस्था पटरी पर आती दिखी। जनवरी-फरवरी तक ऐसा लग रहा था कि कोरोना का सफाया हो चुका है। पर जिस तरह से पिछले 2 महीने से मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है लोगों को अब डर सता रहा है कि कहीं फिर से वही माजरा ना दोहराया जाए।