ज्यों-की-त्यों धर दीन्हि चदरिया

.    “उठो पार्थ
.    उठाओ गांडीव
 .   और करो सँहार।"

यह भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन से कहा था।
"उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।"
उठो जागो और तब तक मत रुको, जब तक अपने लक्ष्य तक न पहुँच जाओ।
यह स्वामी विवेकानंद ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा था।
दोनों ही कथन भारत के वर्तमान समय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक है। यदि भारत को अपराध मुक्त बनाना है, तो युवाओं को उठना होगा, जागना होगा और अपराधियों के खिलाफ सरकार और समाज के साथ मिलकर इस अन्याय को समाप्त करने के लिए आगे आना होगा। पहल कहीं-न-कहीं से करनी होती है और खुशी की बात है कि भारत में यह पहल हो चुकी है।मध्य प्रदेश के सेवानिवृत्त विशेष पुलिस महानिदेशक (पुलिस सुधार) मैथिलीशरण गुप्त (1984 बैच) अब यह आह्वान कर आगे आए हैं।उन्होंने गांडीव उठा लिया है !
अच्छी बात यह है कि यह पहल देश में मध्य प्रदेश से हुई है।मैथिलीशरण गुप्तइस कार्यक्रम को जुलाई में लेकर आए हैं।अभी तक हुए देशभर के सैकड़ों लोगों से संपर्क कर चुके हैं और इस अभियान को मुकाम तक पहुंचाने के लिए पूरी ताकत से जुटे हैं।अपराध मुक्त भारत की योजना का प्रारूप मैथिलीशरण गुप्त तैयार कर  चुके हैं।यह योजना क्या है और इसका स्वरूप क्या है, यह जानने-समझने के पहले देश में अपराधों की एक तस्वीर पर नजर डालना उचित होगा।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने  वर्ष 2019 में भारत में हुए अपराधों की रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 7.3% की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल महिलाओं के खिलाफ 405861 मामले दर्ज हुए थे।जेल के भीतर 1543 महिला के कैदी बंद हैं।उनके साथ 1779 बच्चे भी हैं।इन महिलाओं में से 325 सजायाफ्ता हैं और शेष विचाराधीन कैदी हैं। इसी प्रकार से बच्चों के खिलाफ अपराधों में भी 4.5% की वृद्धि दर्ज की गई है।
राहत की एक बात यह जरूर है कि डकैती और लूट के मामलों में कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक जेलों में 144125 सजायाफ्ता कैदी हैं।330487 कैदी विचाराधीन है। जेलों में क्षमता से दोगुना कैदी ठूँसे गए हैं। देश में 1350 जेल है, जिनकी क्षमता 403739  कैदियों को रखने की है। यानी जेलों में 118.5 प्रतिशत अधिक कैदी रखे गए हैं। जहां तक आत्महत्या का सवाल है,  रिपोर्ट कहती है प्रतिदिन 38 बेरोजगार और लगभग इतने ही छात्र आत्महत्या करते हैं।
देश में अपराधों की इन स्थिति और परिस्थितियों से निपटने के लिए यह एक अच्छी पहल हुई है और भारत सरकार की ओर से भी इसमें सकारात्मक दृष्टिकोण में अपनाया जा रहा है।
मैथिलीशरण गुप्त ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन पुलिस अनुसंधान विकास ब्यूरो (बी पी आर एन डी) के साथ मिलकर हम लोग पुलिस सुधार पर एक प्रोजेक्ट के तहत काम कर रहे हैं। हमने मौजूदा पुलिस तंत्र में सुधार करने के लिए जनभागीदारी और पुलिस को मिलाकर एक योजना बनाई है। इसका मसौदा भी तैयार कर लिया गया है। इसे परीक्षण के लिए देश के सभी विधि विश्वविद्यालयों को भेजा गया है। इसके बाद इसका प्रकाशन किया जाएगा और सभी के सामने यह रखा जाएगा।
इस योजना की विशेषता यह है कि इसमें विज्ञान और टेक्नोलॉजी का खुलकर इस्तेमाल किया गया है और साथ ही जनभागीदारी की गई है।इससे जो परिणाम प्राप्त होंगे, वह बहुत चौंकाने वाले होंगे और देश में अपराधों की तस्वीर बदल जाएगी—अपराध मुक्त भारत का मिशन पूरा हो जाएगा।यह असंभव नहीं है और बहुत दूर भी नहीं है, सिर्फ इसे प्रभाव-शील करने की आवश्यकता है।
इस योजना के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए मैथिलीशरण गुप्त रोज नियम से सोशल मीडिया पर एक जन-जागरण अभियान चला रहे हैं।उन्होंने अपराध मुक्त भारत, जिसे हम क्राइम फ्री भारत कह सकते हैं, इस नाम से एक यूट्यूब चैनल शुरू किया है।उनका कहना है कि अपराधों से मुक्ति, रक्षा और सुरक्षा—यह मौलिक अधिकार है और इसके लिए एक जन आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है।अपने इस अभियान को गतिशील बनाए रखने के लिए वे रोज दिन में कई बार यूट्यूब पर लाइव होते हैं और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जाकर उनके साथ इस योजना पर संवाद करते हैं।वे उन्हें इस योजना की जानकारी देते हैं और प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी देते हैं।वह बताते हैं कि किन तरीकों से योजना को सफल किया जा सकता है।
योजना की विशेषता बताते हुए मैथिलीशरण गुप्त ने कहा कि—इस योजना से अपराधों का पंजीयन 100% होगा।यानी किसी का एफ़आइआर दर्ज न की जाए, ऐसा संभव ही नहीं होगा। दूसरी बात, इसमें आरोपी की गिरफ्तारी हर हाल में होगी। तीसरी बात, उसे सजा भी किसी भी कीमत पर मिलेगी। चौथी बात, अपराधी का 100% पुनर्वास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि  अपराधों के अनुसंधान और  उसकी विवेचना का कार्य और लॉ एंड ऑर्डर को देखने का कार्य—यह दोनों ही कार्य करने के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें होंगी। पुलिस को जांच और गिरफ्तारी के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी मदद उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जन-जागरण के लिए और लोगों को इस अभियान से जोड़ने के लिए वह प्रतिदिन यूट्यूब पर लाइव होकर इंटरएक्टिव सेशन आयोजित कर रहे हैं। इसे हर सोमवार की शाम 5:30 से 7:30 बजे तक देखा जा सकता है।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि अंग्रेजों ने भारत में 1861 में, मौजूदा पुलिस को अपने मनमाफिक तंत्र में नियमित करने के लिए तत्कालीन पुलिस एक्ट तैयार किया था।उसकी दो प्राथमिकताएं तय की गई एक तो यह कि पुलिस अपने सुरक्षा अधिकारी की आज्ञा का पालन हर हाल में करें और दूसरी बात यह कि पुलिस गोपनीय जानकारी और सूचनाएँ एकत्र कर अपने उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत करे।मतलब साफ़ है कि अंग्रेजों ने  अपना जो पुलिस तंत्र विकसित किया, वह ब्रिटिश साम्राज्य के हितों को देखते हुए किया था। लेकिन हम अभी भी उसी से चिपके हुए हैं।1857 के ग़दर से अंग्रेज़ अंदर तक हिल गए थे। उन्होंने सोचा नहीं था कि इस क़दर और इस हद तक भी बग़ावत हो सकती है।लेकिन सत्तावान के ग़दर के बाद उन्होंने हिंदुस्तान की समूची परिस्थितियों का आकलन कर लिया और नए सिरे से अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया उसी के तहत उन्होंने ग़ज़ब के मार्फ़त चार साल बाद पुलिस ऐप को बनाया।इसी के साथ ब्रिटिश प्रणाली के अनुसार डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और पुलिस कप्तान के पद सृजित किए गए और उनकी नियुक्तियां की गई उस ज़माने में आज की तरह राज्य और केंद्र शासित प्रदेश नहीं हुआ करते थे इसके बजाए देश बड़े बड़े प्रॉविन्स में बँटा था। प्रॉविन्स और ज़िलों की संख्या कम थी, और एक जिला एक राज्य के बराबर था। समझा जा सकता है कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट यानी कलेक्टर की ताक़त कितनी थी।अंग्रेजों की इस शोषण वादी व्यवस्था को हम लोग अभी भी चला रहे हैं।