उत्तर बस्तर कांकेर : जिले के भानुप्रतापपुर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत    बांसकुण्ड के आश्रित ग्राम बनौली की राधा स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने लाख पालन का अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत् गठित राधा महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर के द्वारा वर्ष 2018 के मई माह में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत दो एकड़ भूमि में सेमियालता के 4 हजार पौधों का रोपण किया जाकर लाख उत्पादन का कार्य प्रारम्भ किया गया। रोपे गये सेमियालता पौधों में एक वर्ष पश्चात् माह जुलाई 2019 में बिहन लाख निवेशित किया गया, जिससे छः माह पश्चात् 2 क्विंटल लाख का उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसमें से 01 क्विंटल लाख को 350 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से 35 हजार रूपये में विक्रय किया गया और बचत 01 क्विंटल लाख को जनवरी-फरवरी माह में कुसुम के वृक्ष में बिहन लाख के रूप में उपयोग किया गया, जिससे जुलाई माह में पुनः 8 क्विंटल लाख का उत्पादन प्राप्त हुआ, इसमें से 6 क्विंटल 45 किलोग्राम लाख को 270 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय कर 01 लाख 74 हजार 150 रूपये की आमदनी प्राप्त की गई,  शेष 01 क्विंटल 55 किलोग्राम लाख को जुलाई माह में पुनः सेमियालता पौधे में बिहन के रूप में लगाया गया है, जिससे आगामी दिसम्बर माह तक 7 से 8 क्विंटल लाख उत्पादन होने की संभावना है।
     इस प्रकार गांव के खाली पड़ी शासकीय भूमि में मनरेगा की सहायता से ग्राम बनौली के राधा स्व सहायता समूह की महिलाओं ने एक बार निवेशित किये गये लाख से पुनः सेमियालता एवं कुसुम के वृक्ष में वर्ष भर लाख उत्पादन के मॉडल को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया हैै। उनकी इस सफलता में अम्बेडकर विश्वविद्यालय नई दिल्ली के छात्र एवं सहभागी समाजसेवी संस्था का भी सहयोग रहा है। राधा स्व-सहायता समूह की महिलाओं की इस उपलब्धि से बिहन लाख समय पर नहीं मिलने की समस्या से अन्य लाख उत्पादक किसानों को भी मुक्ति मिलेगी।