कहते हैं मनुष्य के रूप में जन्म जीव को कई वर्षों में एक बार मिलता है, इसलिए कहा जाता है कि हर मनुष्य को अपने जीवन में ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे उसकी श्रेष्ठता बढ़े। कहने का अर्थ है मनुष्य को नेक और अच्छा कार्य करने चाहिए ताकि जीवव को सफल बनाया जाए। क्योंकि जब व्यक्ति की मृत्यु के बाद केवल उसके केवल अच्छे कर्म ही याद किए जाते हैं। परंतु आज कल के लोग इन बातों की सीरियस नहीं लेते और बुरे कर्म करते जाते हैं। इस संदर्भ में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जब तक व्यक्ति का शरीर निरोगी हो, मृत्यु दूर हो, हालांकि मृत्यु कब आ जाए इसके बारे में कोई नहीं जानता। मगर जब तक शरीर आपका साथ न छोड़े, तब तक प्रत्येक व्यक्ति को आगे बताए गए काम करने चाहिए। क्या है वो काम, आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य द्वारा बताई नीति से-

आचार्य चाणक्य कहते हैं जो व्यक्ति अपने से पहले दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करते हैं, सुख के साथ-साथ दूसरों के दुख में भी साथी बनते हैं। उन्हें जीवन में हर जगह सम्मान प्राप्त होता है। चाणक्य कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी अच्छे कार्य को करने के लिए इंतज़ार नहीं करना चाहिए। बल्कि हमेशा अच्छे अवसर करने का हमेशा लाभ उठाना चाहिए।

कभी किसी प्रकार के कार्य को कल पर न सौंपे। बल्कि हमेशा अपने आलस का त्याग कर हर काम को समय पर पूरे करें। जो लोग कार्य को टालना पसंद नहीं करते, समय पर हर कार्य संपन्न करते हैं उन्हें समाज में उच्च स्थान प्राप्त नहीं होता।
आखिर में चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को अपनी आत्मा को शुद्ध रखना चाहिए। हर पतरह के लोभ से दर रहना चाहिए। और मानवता को ध्यान में रखकर ही हर कार्य करना चाहिए। बुरी आदतों से दूरी बनाई रखनी चाहिए।

जो व्यक्ति इन बातों का ख्याल रखता है वह सफलता की बुलंदियां हासिल करता है। इनके अदंर आत्म विश्वास और सकारात्मकता की कमी नहीं होती, जीवन में बहुत उच्च स्तर पर कामयाबी हासिल करते हैं।