फाल्गुन कृष्ण पक्ष की उदया तिथि अमावस्या के दिन स्नान-दान-श्राद्धादि की अमावस्या है. इस दिन शनिवार पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या या फाल्गुन अमावस्या कहा जाता है. पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 12 मार्च से होने जा रहा है. इस अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इस दिन व्रत रखकर पूजा करने से कई प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है.

कब से कब तक रहेगी शनि यानी शनैश्चरी अमावस्या

शनैश्चरी अमावस्या या फाल्गुन अमावस्या 13 मार्च को है. शनैश्चरी अमावस्या तिथि का प्रारंभ 12 मार्च को दोपहर 03 बजकर 02 मिनट से हो रहा है, जो 13 मार्च को दोपहर 03 बजकर 50 मिनट तक रहेगा.

देवपितृ और शनैश्चरी अमावस्या का संयोग

पंचांग के अनुसार, इस बार फाल्गुन अमावस्या पर देवपितृ कार्य और शनैश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है। फाल्गुन अमावस्या शनिवार के दिन पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, साध्य योग, नाग करण व कुंभ राशि में चंद्र देव स्थित होंगे.

शनिवार के दिन अमावस्या होने से शनि ग्रह की शांति होती है

शनिवार के दिन अमावस्या की तिथि पड़ने के कारण इस दिन शनि देव की पूजा करने से विशेष शांति होती है. जिनके जीवन में शनि से जुड़ी कोई परेशानी आ रही है वो अगर इस दिन विधि पूर्वक शनिदेव का उपाय करें तो उन्हें लाभ मिलता है. इस दिन शाम के समय शनि मंदिर में शनि देव की पूजा करने से पुण्य प्राप्त होता है. इसके अलावा शनिवार के दिन की अमावस्या ढैय्या से मुक्ति पाने के लिये बहुत ही अच्छा है. साथ ही इस दिन पितृ दोष आदि से भी छुटकारा पाया जा सकता है.

शनि अमावस्या के दिन क्या ये काम

शनि अमावस्या के दिन सुबह उठने के बाद दैनिक कार्यों से निवृत होकर गंगा या किसी भी पवित्र नदी में जाकर स्नान करना चाहिए

अमावस्या के दिन सुबह सूर्य चालीसा का पाठ करें

भगवान सूर्य के 12 नामों का जाप सुबह के समय घी का दीपक जलाकर करें

इस दिन शाम को पीपल के पेड़ के पास सरसों तेल का दीया जलाएं और पीपल पेड़ का सात चक्कर भी लगाएं. ऐसा करते समय अपने पूर्वजों को याद करें

फाल्गुन अमावस्या के दिन गरीबों को दान करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आपके पूर्वज खुश होंगे

इस दिन महादेव मंदिर जाकर शिव भगवान को गाय का दूध, दही और शहद से अभिषेक करें। साथ ही काला तिल भी चढ़ाएं

फाल्गुन अमावस्या के दिन भगवान शिव, अग्नि देवता और ब्राह्मणों को उड़द दाल, दही और पूरी के रूप में नैवेद्यम जरूर अर्पण करें