अमेरिका ने ईरान पर हमला किया: क्या पाकिस्तान ने उसकी एयरस्पेस दी
लौहार । 22 जून को अमेरिका ने ईरान के नतान्ज एटॉमिक सेंटर पर एयरस्ट्राइक की, इस एयरस्ट्राइक को पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताकर निंदा की। इतना ही नहीं पाकिस्तानी नेता खुद को ईरान का मित्र बताकर मुस्लिम एकता और क्षेत्रीय भाईचारे की दुहाई देते रहे। लेकिन इन दावों के पीछे पाकिस्तान की हकीकत कुछ और ही थी। पाकिस्तान ने अमेरिका को सीक्रेट तरीके से हवाई मार्ग, खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया था। यह ऐसा खुलासा है, जिसके बाद ईरानी सेना ने पाकिस्तान को धोखेबाज कह दिया है।
एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया हैं कि हमले से कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने अमेरिकी टैंकर और टोही विमानों को ओवरफ्लाइट की मंजूरी दी थी। यह अनुमति चुपचाप सुरक्षित चैनलों के जरिए दी गई और अमेरिका-पाकिस्तान के पुराने काउंटर टेररिज्म समझौतों के तहत इस्लामाबाद और रावलपिंडी के बीच यह ऑपरेशन अंजाम दिया गया। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने पाकिस्तान के व्यवहार को धोखा बताकर दावा किया कि अगर पाकिस्तान हवाई मार्ग और खुफिया जानकारी न देता तब अमेरिका यह हमला कतई नहीं कर पाता। हालांकि शाहबाज सरकार ने इन दावों को गलत बताकर खारिज किया है।
ईरान ने सीमा पर आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दिए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच वर्षों से चल रहे सुरक्षा सहयोग पर खतरा मंडराने लगा है। इस्लामाबाद के लिए यह कोई पहली दुविधा नहीं है। पाकिस्तान एक ओर मुस्लिम दुनिया में अपनी छवि एक रक्षक और नेता के रूप में प्रस्तुत करता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका से सुरक्षा, खुफिया और आर्थिक सहयोग उसकी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
विपक्षी दलों ने इस पर शाहबाज सरकार को आड़े हाथों लिया है। कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि सरकार ने “इस्लामी एकता को अमेरिका के आगे गिरवी रख दिया। यहाँ तक कि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग करने वालों को भी निशाना बनाया गया।
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