राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की मुलाकात से सियासी अटकलें तेज
नई दिल्ली: देश की राजधानी में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) को और अधिक मजबूत तथा सक्रिय करने की कवायद तेज हो गई है। इसी सिलसिले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह अहम बैठक दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर आयोजित हुई, जिसे आगामी समय में विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल और एकजुटता बनाने के लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है।
सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात के बाद बढ़ी सक्रियता
राजनीतिक गलियारों में यह बैठक इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले मंगलवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की थी। उस उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान दोनों वरिष्ठ महिला नेताओं ने गठबंधन को जमीनी स्तर पर और धारदार बनाने के विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की थी। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब राहुल और अभिषेक की यह बैठक हुई है।
बीजेपी के खिलाफ साझा रणनीति बनाने पर जोर
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की इस बातचीत का मुख्य एजेंडा दिल्ली में इसी हफ्ते हुई 'इंडिया' गठबंधन की सामूहिक बैठक के फैसलों को आगे बढ़ाना है। उस बैठक में सभी विपक्षी दलों ने इस बात पर पूरी सहमति जताई थी कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नीतियों का मुकाबला करने के लिए आपसी सहयोग को और गहरा करना अनिवार्य है।
मतभेदों को भूलकर जनता के मुद्दों पर साथ आने की अपील
यह बैठक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई है जब पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में अपेक्षित परिणाम न मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं के असंतुष्ट सुर सामने आए हैं। सोमवार को हुई विपक्षी कुनबे की बैठक में ममता बनर्जी ने गठबंधन के सभी साथियों से स्पष्ट तौर पर अपील की थी:
"पार्टियों को अपने स्थानीय मतभेदों और आपसी कड़वाहट को एक तरफ रख देना चाहिए। इस समय सबसे ज्यादा जरूरी जनता से जुड़े प्रमुख मुद्दों को उठाना और उन पर मिलकर संघर्ष करना है।"
हालांकि, इस बंद कमरे की बैठक में हुई बातचीत का पूरा ब्योरा आधिकारिक तौर पर साझा नहीं किया गया है, लेकिन राजनैतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस और टीएमसी के बीच कम होती दूरियों और बढ़ते भरोसे के संकेत के रूप में देख रहे हैं। विपक्षी दल अब संसद से लेकर सड़क तक सत्तापक्ष के खिलाफ एक साझा और ठोस घेराबंदी करने की तैयारी में जुट गए हैं।
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