मेलबर्न के भारतीयों के बीच नरेंद्र मोदी •पंकज पाठक•
ज्यों-की-त्यों धर दीन्हि चदरिया
मोदी का संदेश—ग्रो मोर, अचीव मोर
मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में गत 9 जुलाई 2026 को आयोजित मेलबर्न मीट्स मोदी सामुदायिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन पर वहां मौजूद 30,000 से अधिक लोगों के हुजूम ने अपने फोन की फ्लैशलाइट जलाकर और भारत व ऑस्ट्रेलिया के झंडे लहराकर पूरे स्टेडियम को रोशनी के साथ दोनों देशों की दोस्ती का संदेश दिया, जो 2023 में सिडनी में जुटे 23,000 लोगों की संख्या से काफी अधिक था। इस ऐतिहासिक अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारतीय प्रवासियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अनूठी संस्कृति से ऑस्ट्रेलिया के बहुसांस्कृतिक चरित्र को समृद्ध किया है और आधुनिक ऑस्ट्रेलिया के विकास में एक बड़ा योगदान दिया है। इस भव्य शाम की शुरुआत भारत के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई, जिसमें भगवान विष्णु के दस अवतारों के माध्यम से योग को श्रद्धांजलि देने से लेकर उत्तराखंड की अनूठी लोक संस्कृति, राजस्थान, असम के बिहू, केरल, पंजाब, गुजरात, कश्मीर और गोवा के पारंपरिक लोक व शास्त्रीय नृत्य शामिल थे, तथा इसका समापन शिवाजी महाराज को समर्पित मराठा शैली की प्रस्तुति से हुआ। इसी सांस्कृतिक उत्सव के दौरान विवेकानंद सोसाइटी ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सामुदायिक नेता योगेश भट्ट—जो मूल रूप से उत्तराखंड के द्वाराहाट के धनखाल गांव के रहने वाले श्री गिरीश चंद्र भट्ट के सुपुत्र हैं और पिछले 12 सालों से मेलबर्न में रहते हुए यहाँ की प्रसिद्ध टेल्स्ट्रा कंपनी में सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं—ने इस भव्य आयोजन में ऑस्ट्रेलिया इंडिया फाउंडेशन की रजिस्ट्रेशन टीम के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।

इस दौरान योगेश भट्ट और उनकी टीम ने स्वयं रचित नमो नमो गीत पर एक विशेष प्रस्तुति दी, जिसे उन्होंने देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का मिश्रण बताते हुए उम्मीद जताई कि यह गीत एक दिन मोदी जी तक जरूर पहुंचेगा। इसके साथ ही, योगेश भट्ट ने उत्तराखंड के पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया; उत्तराखंड एसोसिएशन ऑफ ऑस्ट्रेलिया के घुघुती ग्रुप द्वारा दी गई इस शानदार प्रस्तुति में उन्होंने तीन अन्य लोगों के साथ प्रसिद्ध छोलिया नृत्य किया, जबकि उनकी धर्मपत्नी और उत्तराखंड पृष्ठभूमि की 8 अन्य महिलाओं ने भी इस प्रदर्शन का गौरव बढ़ाया। कार्यक्रम का सबसे यादगार और विशेष क्षण तब आया, जब खुद प्रधानमंत्री मोदी ने योगेश भट्ट से मुलाकात की और उन्हें देखते ही मुस्कुराते हुए उत्तराखंड कहा, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। इस कार्यक्रम में एक भावुक क्षण तब भी देखा गया, जब पता चला कि योगेश भट्ट की 9 साल की बेटी, जो पिछले 2 साल से प्रधानमंत्री मोदी की बहुत बड़ी प्रशंसक है और उन्हें कई पत्र व वीडियो भी भेजती रही है, इस बार भी अपने चहेते नेता से व्यक्तिगत रूप से नहीं मिल सकी। समाज में बेहद सक्रिय रहते हुए ऑस्ट्रेलिया में उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाले योगेश भट्ट और सभी कलाकारों की इस बेमिसाल ऊर्जा को भारत-ऑस्ट्रेलिया दोस्ती का सबसे मजबूत स्तंभ बताते हुए अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के प्रवासियों को भविष्य में और बड़ी सफलताएं हासिल करने के लिए प्रेरित किया तथा इस मंच से—ग्रो मोर, अचीव मोर (अधिक बढ़ें, अधिक हासिल करें) का एक नया नारा भी दिया।

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