कुपोषण और बीमारियों का खतरा बढ़ा, ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
बेमेतरा: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से बड़ा खुलासा हुआ है। ग्रामीण इलाकों की राशन दुकानों में बांटे जा रहे चावल की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि राइस मिलर्स द्वारा घटिया और खराब चावल की सप्लाई की जा रही है, जिससे वे मजबूरी में खराब अनाज लेने पर विवश हैं।
ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि राशन से मिलने वाला चावल टूटे, बासी दानों से भरा होता है। कई बार उसमें कीड़े और बदबू भी आती है। लोगों का कहना है कि यह चावल खाने योग्य नहीं है, लेकिन गरीबी के चलते वे इसे लेने को मजबूर हैं।
राइस मिलर्स पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों और राशन दुकानदारों का आरोप है कि कई राइस मिलर्स सरकार की योजनाओं में घोटाला कर रहे हैं। गरीबों के लिए भेजे जाने वाले अच्छे गुणवत्ता वाले चावल की जगह घटिया चावल सप्लाई किया जा रहा है। इससे न केवल ग्रामीणों का हक मारा जा रहा है, बल्कि सरकारी योजना की छवि भी धूमिल हो रही है।
स्वास्थ्य पर खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, सड़े-गले चावल का सेवन लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, ऐसे में कुपोषण और बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है।
प्रशासन की लापरवाही
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतें कई बार प्रशासन तक पहुंची हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जांच और सख्त निगरानी के अभाव में यह गड़बड़ी लगातार जारी है।
ग्रामीणों की मांग
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घटिया चावल की सप्लाई पर तुरंत रोक लगे
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दोषी राइस मिलर्स पर सख्त कार्रवाई हो
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राशन दुकानों पर केवल मानक गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराया जाए
प्रशासन का पक्ष
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित मिलर्स और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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