ज्यों-की-त्यों धर दीन्हि चदरिया

क्या यह तूफ़ान के पहले की ख़ामोशी, पार्टी परिणाम की कर रही है समीक्षा

नरोत्तम का क्या होगा, यह ठोस प्रश्न, सीएम ने परिणाम गंभीरता से लिया 

भोपाल। ऐसा लगता है मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की यह दतिया विधानसभा सीट भाजपा को मिलनी ही नहीं थी, क्योंकि यहाँ पर प्रत्याशी बदलने के बाद भी परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं जा सका। भाजपा का सर्वेक्षण प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और इस सीट के दावेदार डॉ नरोत्तम मिश्रा के पक्ष में नहीं था, इसलिए पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। यह बात डॉ मिश्रा की कल्पना से परे थी और उनके समर्थक तो इसे स्वीकार करने के लिए जैसे तय्यार ही नहीं थे। लिहाज़ा 3000 कार्यकर्ताओं की टोली दतिया में हिंसक हो गई थी। कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया इस क़दर आई कि उसने भाजपा में चुनाव का टिकट ना मिलने पर हिंसक प्रतिक्रिया का लोमहर्षक इतिहास रच दिया। भोपाल में आज प्रदेश भाजपा दतिया उपचुनाव में पराजय के कारण तलाश रही है।

दतिया के जानकारों का कहना है कि भाजपा अगर नरोत्तम मिश्रा को भी टिकट दे देती, तब भी यही परिणाम होता। जैसा कि भाजपा का सर्वेक्षण भी यही कहता है। अब ठोस सवाल यह है कि आशुतोष तिवारी जैसे संगठन के कार्यकर्ता को हार का सामना क्यों करना पड़ा ? नरोत्तम मिश्रा के आश्वासन के बावजूद और उनके प्रयासों के बावजूद भाजपा का प्रत्याशी वहाँ पर क्यों पराजित हुआ ? नरेंद्र मोदी और अमित शाह के इस नए दौर में प्रदेश में पार्टी की भद्द क्यों पिटी ? भीतरघात हुआ था क्या ? यदि हाँ, तो किसने किया ? अथवा किसने कराया ?

टिकट कटने के बाद की हिंसा को लेकर जब पार्टी के वरिष्ठ नेता पं. रघुनंदन शर्मा से पूछा गया कि भाजपा ने ज़िम्मेदारों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की ? तो उन्होंने कहा था कि भाजपा के लिए संगठन महत्वपूर्ण है। संगठन मज़बूत रहेगा, तो चुनाव जीते जा सकते हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि अगर जाँच में कोई ऐसी बात निकली तो कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि हमने कमलनाथ के क्षेत्र छिंदवाड़ा की सीट
अमरवाड़ा, जो कांग्रेस का गढ़ था, उसे छीन लिया था। लोकतंत्र में जनादेश सर्वोपरि है, हम उसका सम्मान करते हैं और उसी के अनुरूप आगे कार्य करेंगे। लोकतंत्र में जनता के फ़ैसले का सम्मान करने से लोकतंत्र मज़बूत होता है। भारतीय जनता पार्टी का लोकतंत्र के प्रति अटल आस्था है। ऐसी स्थिति में यह देखना दिलचस्प होगा कि नरोत्तम मिश्रा का क्या भविष्य तय होता है ?